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बा केतना गुमान हमरो हो केतना अभिमान ।

बा केतना गुमान हमरो हो केतना अभिमान
हम कैसे कहूँ तोहसे इ बतिया हो राम।
जब से तू अईलू गोरी हमरो महलवा
घरवा में चार चांद लागल तोरे देखी के कजारवा
कु कु कर के बोले कोयलिया होते छत पे बिहान
हम कैसे कहूँ तोहसे इ बतिया हो राम ।
तोरे ही इ पड़ल कदमिया से बा घर में उजाला
आते ही हो गइलू तू हमरो जान के रखवाला
तोरे इ नयनवा में लौके ला अब दुनिया जहान
कैसे कहूँ तोहसे इ बतिया हो राम ।
माई बाबु जी के तू दिल जित लिहऽलू
देवरऽ ननदऽ के तू मित बन गइलू
हमरो बढवलू नजर में सबके तू मान सम्मान
कैसे कहूँ तोहसे इ बतिया हो राम ।
बा केतना गुमान हमरो हो केतना अभिमान
कैसे कहूँ तोहसे इ बतिया हो राम ।
©anuragrahi