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बादलों ने की है बेवफाई अब तो जाना पड़ेगा।

बादलों ने की है बेवफाई अब तो जाना पड़ेगा
सर छुपाने के लिए छांव में आना पड़ेगा।
दिखानी होगी हमें भी रूतबा-ए-गम
अगर हमारे पिछे ज़माना पड़ेगा।
आए थे यहां मयकदे में सुकून ढुंढने
लगता है अब यहां से भी जाना पड़ेगा।
बहुत मन मायुस है पर्दशनी के कलियों के
मजबुरन सबके सामने मुस्कुराना पड़ेगा।
पता तो नहीं था जश्न-ए-बहारां के खातिर
इस खुबसूरत आशियाने को जलाना पड़ेगा।
अगर अनुराग शायर हों फिर ग़म की कहानी
ग़ज़ल के जुबानी तुझे सुनाना पड़ेगा।
©anuragrahi