बाग में एक भौंरा आया और बहार लुट लिया।
क्या करें अब इस पल पल इंतज़ार का
ख़त एक भी नहीं आया दयार-ए-यार का
एक ही बात वो कहती है मुझसे हर बार
कल मौका जरूर दूंगी एक दिदार का
प्यार में वफादारी बहुत जरूरी है
दिल न टूटे कभी ग़मख्वार का
आईना को आईने के शक्ल से न देखा करो
ज़ख़्म हर जगह दिखाई नहीं देते सोगवार का
बाग में एक भौंरा आया और बहार लुट लिया
अनुराग, तुम राह देखते रह गए इज़हार का।