जिसकी आंखें पढ़ लिया करते थे
उसकी बातों में उलझ गए
उसने हर बात झूठ कहीं
हम हर बात सच समझ लिए
रकीब से मिल कर आती थी
मेरे ही प्यार को आजमाती थी
गले के निशान को चोट बताती थी
मेरे इश्क़ में खोट बताती थी
जिसकी आंखें पढ़ लिया करते थे
उसकी बातों में उलझ गए
©krishna09
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