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" बैचेन हृदय "

हृदय बड़ा बैचेन है
ईश्वर बिन इसे कहा चैन है
बीत रही दिनों की रैन है
उनकी गोद में सोने को तरसता ये बड़ा ही बेचैन है
कैसे समझाये भावों के भवसागर को
अश्रु बरसातें मेघ इसकी ही देन है
बस अब इसके सिवा कुछ ना लिखेंगे
की हृदय बड़ा ही बैचेन है।।
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