C candor en July 23, 2025 "बैरागी" पीहू को झूम के, बैरागी सा फिरता ;कभी बिस्मिल्लाह खान की शहनाई,तो कभी पंडित भीमसेन जोशी के तराने सुनाता ।। हर बात में इस क़दर डूब जाताकी कभी दोहे वो कबीर की पढ़ता, तो कभी गालिब की शेर सुनाता।। ©candor