सुखी पलक की औट मे समंदर दबाये बैठा हूँ
जिंदा हूँ फिर भी मेरी ही अर्थी सजाये बैठा हूँ
कब तक जिंदा रहूंगा इसी का हिसाब लगा बैठा हूँ
चार दिन बचे हैं जिनमे भी तुमसे प्यार कर बैठा हूँ
इन प्यार के रास्तो पर खुद को ही जला बैठा हूँ
उस बेवफ़ा की यादो मे मौत को गले लगा बैठा हूँ
तेरी यादो को भुलाने के लिए महखाने मे बैठा हूँ
दर्द-ए-दिल मिटाने को मुह से बोतल लगाए बैठा हूँ
तुम्हें अकेले छोड़ जाने की तरकीब लगाए बैठा हूँ
आना जनाजे मे मैं कुछ दर्द तेरे लिए छोड़ बैठा हूँ
©5bharat
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