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Banjransays

अब तेरे जाने का ग़म नहीं है,
मुस्कुराती हूँ मैं आँखें नम नहीं है,
हवाएँ पहले सी रंगीन लगती है,
अब सिर्फ जिस्म नहीं मेरी रूह महकती है,
रातों को सुकून से सोती हूँ,
अब मैं नहीं यूँ बेवजह रोती हूँ,
ख्वाब अब मैंने फिर से आँखों में सजा लिए है,
तेरी वो रुसवाइयाँ, बेवफ़ाई, बेरुखी अब कहीं दूर छोड़ दिए है!!
अब मैं बंजारन बेबाक घूम रही हूँ,
लबों से नहीं अपनी कलम से सबके दिल चूम रही हूँ,
सुनो अब तेरे जाने का ग़म नहीं है..!!!!
©banjaran