V

बचपन के सुनहरे दिन

बचपन एक कहानी है ,
जो याद मुझे मुंह जवानी है ,
रूठना मनाना हंसना खिलखिलाना इस उम्र की सुनहरी निशानी है ।
माथ पर नजर का काला टीका पाव पायल बजता था मीठा ।
मां का पल्लू और पल्ले में सुख सारे संसार का था ।
खिलौने में सिमटा सारा जहां था ।
क्या सुबह क्या शाम था ,
हर वक्त लगता है एक समान था।
बचपन एक कहानी है जो याद मुझे मुंह जवानी है ।
©vibhasingh