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बड़े शातिर थे हमें जंजाल में फंसाने वाले।

बड़े शातिर थे हमें जंजाल में फंसाने वाले
यूंही नहीं कहते थे उस्ताद उन्हें जमाने वाले।
अब ये आग कई दिनों तक ऐसे ही जलेगी
आग उसी शख्स ने ही है लगाई जो है बुझाने वाले।
उसने गीता कुरान बाइबिल ग्रंथ सब पढ लिया मगर
एक लफ्ज़ भी नहीं कह पाया दुरियां घटाने वाले।
खुशियां जहाँ से भी आए दोनों हाथों से समेटा करे
लम्हें भरें पड़े हैं बहुत यहां रूलाने वाले।
भरोसे किस्मत के न बैठ हाथ पे हाथ डालकर
भगा देंगे घर से जो थे घर बसाने वाले।
मेरे सादगी को तुमने एक बेबसी का नाम दे दिया
बद्दुआ है मेरी नहीं मिलेगा तुझे मुझ जैसा चाहने वाले।
©anuragrahi