बड़ी बड़ी ख्वाइशों ने गिराया हमें जमीं पर
बड़ी बड़ी ख्वाइशों ने गिराया हमें जमीं पर
खुदा ने भी हर ज़ोर आजमाया हमीं पर
मेरी कोशिशें जब फलक को छू न सकी
मैंने एक छोटा सा घर बनाया जमीं पर
मेरे सभी ज़ख़्म ताज़े है कभी सुखते नहीं
बहुत सारे दर्द सजाएं है अश्कों की नमी पर
मैं कैसा हूं क्यों हूं किसी ने समझना नहीं चाहा
फकत नुक़्स निकाला लोगों ने हमीं पर
देखते है कितने दिन जी पाता है और जिंदगी
यकीन नहीं रहा अब खुद अपने यकीं पर
ताउम्र शहर-ए-इश्क रहा उल्फत के गीत गाएं
छिटें प्यार के गिरने बजाए अनुराग के गिर गये जमीं पर
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