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बेबस।

यूँ ही नहीं रहती है ये रातें खामोश,
कुछ तो डर है, उसे अंधेरे से बिछड़ने का,
एक कारण ही किरण है, अंधेरा बेबस करने का,
फिर तो पहर ही है, खामोशी भंग होने का।।
©ravioo