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बेबसी

दिल मे उठ रहा एक तूफान है
जिस रास्ते मैं चल पड़ा वो अनजान है
न जाने कौन कौन मिलेगा इस राह पर मुझे
कोई अनदेखा और किसी से पहचान है
निकल पड़ा हूँ ख़ुद की शख्सियत ढूंढने
सोच यही कि कह सकू एक दिन मेरी भी कुछ पहचान है।
नही है रास्ता आसानी से भरा
कही ठोकर तो कही पत्थरो की भरमार है।
फिर भी ये दिल नही मानता हार किसी से
चाहे कितना भी हो डर किसी से
कभी जितने का हौसला तो कभी हार जाने का डर
ओर इसी बीच मे फंस पड़ा आज फ़िर एक इंसान है।
रख हौसला जीतने का तू खुद में
रख भरोसा खुद की क्षमताओं पर
चाहे कोई ओर हो न हो साथ तेरे
तेरा दिल अगर सच्चा है
तो तेरे साथ खुद भगवान है।

दिल की कलम से
by पंकज कुमार स्वामी
©poetpankaj