बेपनाह इश्क
हुकुम की हुकूमत की परवाह नहीं अब,
इश्क़ होगा, फिर होगा और बेपनाह होगा।
इल्तिजा करूं दिल से, ख़ुद को बुलंद कर इतना,
ख़्वाहिश है मेरी, दुबारा अब ये गुनाह होगा।
तेरे हुस्न का दीदार हो, तेरी यादों का हिसाब हो,
मोहब्बत बेइंतहा मेरी, कौन इसका गवाह होगा।
क़यामत भी आए तो क्या ख़ौफ़ अब,
महबूब मेरे, परवाना तेरा फिर तबाह होगा।
© विशाल सैनी
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