S

बेरूखी।

पैसों की पहचान वगरना मेरी किमत कुछ नहीं,
इस मतलबी दुनिया में रिश्तों की अहमियत कुछ नहीं ।
मेरी शर्मिली आंखो को अब खुद से शर्म आ जाती है,
चारों तरफ फकत अंधेरा है उजाले का निसां तक कुछ नहीं ।
©anuragrahi