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बेटी

कुछ तो इस संसार में आई ही नहीं,
जो बची वो हैवानियत की शिकार हो गई,
कुछ तो जिंदगी भर रही डरी सहमी सी,
और जो बची है दहेज की आग में जल गई।
द्वारा:- शुभ शर्मा
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