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बेटी जन्म

शर्मा जी की वाइफ शर्मीली ने
दिया जब एक परी को जन्म
तो सास ननद बेशर्मी से बोली
लो जी फूट गए हमारे कर्म
लेकिन शर्मा जी हैप्पी हैप्पी
बांटने लगे मिठाई
खाकर भी नाक सिकोड़े
देखो जी भौजाई
बोली देखो छोरी पाकर भी
कितना रहा उछल
या तो है ग़लतफ़हमी
या फिर हो गया पागल
भोजाई की सुनकर बात
शर्मा जी ने मन की गठरी खोली
रात के भोजन की दावत देकर
थमाई साथ में सिर दर्द की गोली
पड़ोसी बोले बिटिया के जन्म पर
जो तुम्हें हो रही है इतनी ख़ुशी
अगली बार भी बेटी होगी
तो हो जाओगे दुःखी
शर्मा जी कहे बंद करो
परिवार कल्याण का ज्ञान
बेटा हो या बेटी दोनों हैं इंसान
दोनों ही माता पिता की संतान
दोनों से मिले माता पिता को पहचान
पुत्र भी दे सकता है अपमान
तो पुत्री भी बढा सकती है मान
फिर भी पुत्री से पुत्र महान
तो दूर करो अपना अज्ञान
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©vikasgarg