वो कौन थी?
जिसने मेरे दिल पे
दस्तक दी थी
वो कौन थी?
जिसकी खुश्बू फिजाओं में
अभी तक है ठहरी
वो कौन थी?
जिसकी एक झलक खातिर
कितने बेताब हुआ करते थे
वो दिलरूबा कौन थी?
जिसने जमाने को
बेचैन कर रखा था
वो हसीना कौन थी?
जिसकी चाहत मुझे
हर पल रहती थी
क्या किसी ने
कभी उसका हाथ पकडा?
क्या किसी ने कभी
उसका साथ पकडा?
साथ कितनों के रही वो
पास कितनों के रही वो
बदल देती थी ठिकाना
जैसे खाली होता खजाना
हाथ मलते रह ग्ए बेचारे
उसकी मुहब्बत में मारे
बेवफा तो है मगर
वफा की लोग करते उम्मीद
ठोकरें खाकर भी
उसके हुस्न की करते ताकीद
©selfmade
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