सुखदेव, भगत सिंह, राजगुरु, आजादी के दीवाने थे, हंस-हंस के झूले फांसी पर भारत मां के मस्ताने थे ।
वह मरे नहीं हैं जिन्दा हैं, वह अमर शहीद कहाएंगे,
वह प्यारे वतन पै निसार हुए, वह वीरों में मरदाने थे.
मर्जी उस मालिक की थी, सब उसने खेल दिखाए हैं,
था लिखा उन्हें कुर्बान होना, फांसी के मुफ्त बहाने थे, ब्रिटिश ने कहा माफी मांगो, शायद जिंदगानी हो जाए,
हंस हंस के सब ने जवाब दिया, नहीं हशर में दाग लगाने थे,
सुखदेव, भगत सिंह, राजगुरु, आजादी के दीवाने थे हंस-हंस के झूले फांसी पर भारत मां के मस्ताने थे ।
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©vicky31
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