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" भाव "

हर दिन संसार के कार्यो में जुटे रहते हैं
फिर भी उसकी लिप्तता से छूटे रहते हैं
जैसे ही एकांत में पहुंचते हैं
लगता है ईश्वर के भाव संग जीते रहते हैं
और नम नैनो से भावुकता को पीते रहते हैं
ना जाने कैसा भाव आता है
अश्रुऔ का बहाव रुक ना पाता है
हृदय बैचेन सा हो जाता है
और साँसों में धीमापन स्थित हो जाता है !!
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