जाना है अपने विचारों से परे...
सुनहरे बादलों को भीतर में धरे...
जहां ना हो बिखरे विचारों की घड़े...
चला जाऊंगा एक दिन मन मे शीतलता भरे...
जहां मन अपनी मनमानी ना करें...
जहां प्रकृति हमें अपनी बाहों में भरे...
जहाँ भीतर का सूखापन पानी से भरे...
जहां भीतर में मेरे सुंदर पुष्पों का बाग खिले...
जाना है अपने विचारों से परे...
जाना है अपने विचारों से परे...
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