हृदय के स्पन्दन में,
सांसारिक बंधन है
धुँधले इस रंगन से,
नैनो में अंधन है
भावों के जंगल में,
ठहराव से मंगल है
अहंकार के दंगल से ,
आनंद में अमंगल है
साधना के संबल में ,
ईश्वरीय कंबल है
जहाँ साँसों के वरंगल में,
महकता ईश्वरीय चंदन है
बस थाम ले वो ईश्वर मुझे ,
उसी में आत्मीय प्रबंधन है ।
आत्मीय प्रबंधन हैं।।
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