यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:|
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्||
परित्राणाय साधुनाम विनाशाय च दुष्कृताम् |
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ||
जब जब होगी धर्म की हानि, जब भी पाप करेगा आनाकानी,
धर्म का फिर से करने श्रृंगार मैं धरती पर आता रहूंगा,
सज्जनों का करने उद्धार, दुष्ट जनों का करने संहार,
धर्म का करने पुनर्निर्माण मैं युग युग में आता रहूंगा
|| कृष्ण भगवान की प्रतिज्ञा ||
©vicky
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