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भीग गईं अंखियां

क्यूं ना श्याम मै तेरी हो जाऊं
गुन गाऊं सुबह शाम आठ पहर
चार पहर यूं बीत गए
दर्श को तेरे आस लगाए।
भीग गई अंखियां राह निहारत
फिर क्यूं ना तुम वापस आए।
©anusingh