भक्त भक्ति में विभोर हो जाता है....
तो हर तरफ जयकारों का शोर हो जाता हैं....
पर मन से शांति का बेर हो जाता है....
और जो व्यक्ति भीतर से ईश्वर को जान ले उसका उनसे मेल हो जाता है....
अच्छे व्यक्ति के भाव में ही ईश्वर का सरोकार हो जाता है.
छोटे बच्चों के भीतर में ही ईश्वर का दीदार हो जाता है.
ईश्वर उस व्यक्ति को नजर आते हैं जो प्रकृति के प्रति वफादार हो जाता है....
इसलिए भक्ति इस तरह करना कि ईश्वर का मंजर आपके भीतर प्रकट हो जाता है....
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