भले मेरे हिस्से संभला हुआ मुकद्दर न आएगा
तुम मेरे साथ चलो रास्ते में तेरे पत्थर न आएगा।
हमने देख लिए है तहखाने की चोर दरवाज़े
तुम फ़सीं रह जाओ अब वो मंजर न आएगा।
वक्त ने सिखा दिया है हर हालात में जीने का इल्म
फलसफा देख लें दिन इससे बदतर न आएगा।
कौन जख़्म पाले रहे किसकी मुराद हो खुसासारी
मगर मेरे ख्वाब में भी अब फुलों का बिस्तर न आएगा।
इस दिल से निकले हुए हर अल्फाज़ में दर्द है
मायने बताने दर्द-ए-दिल का रहबर न आएगा।
जहाँ टुट रहा हो जिंदगी खुद बिखर बिखर कर
वहां शक के दायरा में कोई नश्तर न आएगा।
काग़ज़ के फुलों को गर हमेशा पास रखोगे अनुराग
फिर उनसे असल फुलों का कभी अतर न आएगा।
©anuragrahi
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