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भर आईं आंख पढ नाजराना तेरा।

हम थे प्रदेश और मिली सिरहाना खत तेरा
पिघला दिल भर आईं आंख पढ नाजराना तेरा।
हर वजुद हर अंजुमन ए आबरू तुम्ही से थी
हमने खो दिया साहिल ओ आसना तेरा।
हम जि रहे है बस अब जिने के लिए
खत्म हो गई वो जमाना मेरा तेरा।
खुशी एक वो पंछी है पाले कम ही रहती है
याद है उसको बस आज ठिकाना तेरा।

ले गई जान मेरी रूठ के जाना तेरा
ऐसे आने से बेहतर था न आना तेरा।
तेरे जाने से मरज ए दिल है अनुराग
देख लें कहीं कर दे ठीक नुक्सा पुराना तेरा।
©anuragrahi