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'बहता पानी'

अपने मन में उस एक भाव की चाह रखता हूं जो मुझे पानी की तरह बनाएं उसकी राह तकता हूं
जो देता है सभी को पर अपने खालीपन को लेकर चलता है मैं उसी भाव की खुद में तलाश करता हूं
जो बहता है ना थम कर कहीं मैं उसी का हमराह बनने की चाह रखता हूं
जो सूखे पत्तों को हरियाली से तार करता है मैं उसके निश्चल भाव के भीतर में पनाह तकता हूं
जो कचरे को समेट कर शुद्धता का दान करता है उसकी महानता को सर झुका कर प्रणाम करता हूं
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