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बहता सा दरिया हु में जिसे सुमंदर की तालास है

बहता सा दरिया हु मैं जिसे समुन्दर की तलास है
ना पूछ अब मेरा हाल "ए जिंदगी" जितने भी जख़्म
दिये है अब उन जख्मो से भी गहरा राज हु मैं
©deepakshar