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भटकाता जीवन।

तलाश ए जिंदगी में जिंदगी की शाम हुई
हम क्या अब कोई रिश्ता बचा पाएंगे,
फिर जब जन्म लेंगे फिर बचपन होगी फिर दोस्त बनाएंगे
ये दोस्त अभी मुझे माफ करना फिर कभी दोस्ती निभाएंगे।
©anuragrahi