रोता तो नहीं हूं बस मुस्कुराना भूल गया हूँ,
पहले की तरह अब बस जीना भूल गया हूँ,
जाने किस बात की सोच में बस खोया सा रहता हूँ,
खामोश रहता हूँ बस बक-बक भूल गया हूँ
होती भी है, लेकिन अब शिकायत नहीं करता हूँ,
कोई है भी क्या अपना? मैं अब ये भी भूल गया हूं,
न जाने क्यूँ, एक अरसे से हंसना मैं भूल गया हूँ
दिल मेरा भी करता है कि ख्वाब हकीकत हो,
जब से टूटा हूँ, बस ख्वाब देखना भूल गया हूँ|
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©vikasgarg
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