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भूल गया हूँ

रोता तो नहीं हूं, बस मुस्कुराना भूल गया हूं,
पहले की तरह अब बस जीना भूल गया हूं,
जाने किस बात की सोच में बस खोया सा रहता हूं,
खामोश रहता हूं, बस बक-बक भूल गया हूं,
होती भी भी है लेकिन,
लोगों से अब शिकायत करना भूल गया हूं,
कोई है भी क्या अपना?
मैं अब यह भी भूल गया हूं,
ना जाने क्यों एक अरसे से हंसना मैं भूल गया हूं,
दिल मेरा भी करता है कि ख्वाब हकीकत हो,
जब से टूटा हूं मैं, बस ख्वाब सजाना भूल गया है
🌹🌹🌹
©vicky