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बिगुल बज चुकीं है अब प्यारे ।

बिगुल बज चुकीं है अब प्यारे
हो रहा हर जगह कोहराम अब प्यारे।
हर किसी का खुल रहा कच्चा चिठ्ठा
खुद ब खुद हो रहें बदनाम सब प्यारे।
एक दूसरे पर दोष थोपने की होड़ में
भुल चुके है अपनी सीमा इमान सब प्यारे।
तरह तरह के वादों सपनों से सजी है
आज फिर लुभावनी जुबान सब प्यारे।
आज जोड़े हाथ और फिर पकड़े पैर
पांचवीं साल में दिखने वाले मेहमान है सब प्यारे।
असमंजस में पड़ी हैं जनता पहचानें कैसे
सफेद लिबास के भी है हाथ लाल सब प्यारे।
बेअदब, बेशरम, बेमूरवत के ये लोग जितकर भी
'अनुराग' क्या चलाएंगे सरकार सब प्यारे।
©anuragrahi