कुछ पल बार बार ही वापस आ जाते है।
कुछ गम बार बार ही रुलाते है।।
आप जितना बचना चाहों,
तानों भरी बातों से,
कुछ बातें बार बार तानों के रूप में,
वापस आ ही जाते हैं।।
ना जाने कैसी सौगातें हैं ये,
जो बिन मौसम बरसात हो जाती है।
हर बार जिन्हें खुश करना चाहोे,
उनका रूठना ख़तम होता ही नहीं।
ऐसा लगता है कि ये लम्हा जैसे गुजरता ही नहीं।
बार बार पलट पलट के वापस आ ही जाता है।
मैं जितना चाहूं आगे बढ़ना,
अपनी ओर मुझे ये खींच ही लाता है,
कुछ लोगों को समझ पाना,
नामुमकिन सा हो जाता है।
फिर अपनी भी नासमझी पर,
हंसना भी खूब आता है।
ए जिंदगी तू ही बता दे,
क्यों ये पल बार बार आकर,
मुझे रुलाता है??
क्यों ये बिता हुआ पल वापस आ जाता है??
©anvisha
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