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बिन गोरी कैसे खेली होली हो।

बिन गोरी कैसे खेली होली हो
न मन लागे अब कौनो टोली हो।
केकरा हो गलवा में रंग हम लगाई
केकरा माथवा पर अबीर बरसाई
लगवा न साथ आवे कौनों कली हो
न मन लागे अब कौनों टोली हो।
भुल गईनी सब परब त्यौहार हम
झुमी गावत गितवा आउर दोस्त यार हम
भांगवा के बदले खात बानी निंदवा केगोली हो
न मन लागे अब कौनो टोली हो।
दिल इ रंगिन बांटे मन मुरझाईल
इ जोबना के देखी देखी अंखियां पथराईल
होलीया में के खोली सामने चोली हो
न मन लागे अब कौनो टोली हो
बिन गोरी कैसे खेली होली हो
न मन लागे अब कौनो टोली हो।
©anuragrahi