A

बिन तेरे

एक उम्र गुजर गई तुम बिन जिना.
ना चैन कहीं पाया,
ना शुकुन कभी पाया,
=== ऐ कविता ===
सोचता हूँ फिर से थाम लूँ हाथ तुम्हारा.
शायद वापस मिल जाए,
वो सब जो हमने है गँवाया.
©Arvind sir