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बिटिया रानी


छोटे-छोटे पैरों से चल कर, 
पूरे घर मे सैर कर आती है।। 
उंगली मेरी वो पकड़ कर, 
पापा कहकर बुलाती है।। 
वो नन्ही बिटिया रानी मेरी, 
सबको खूब हँसाती है।। 
निश्छल होकर बातें करती, 
वो जग से अनजानी है।। 
निर्भय होकर खेला करती, 
जैसे यहीं सयानी है।। 
वो नन्ही बिटिया रानी मेरी, 
सबको खूब हँसाती है।। 
वो बातें ऐसे है करती, 
जैसे वही सायानी है।। 
उसके पैरों की आहट से, 
मेरे मन को आराम मिला।। 
उसकी मुख से पापा सुनकर, 
मेरे जीवन को सम्मान मिला।। 
वो नन्ही बिटिया रानी मेरी, 
सबको खूब हँसाती हैं।। 
वो चंचल सुहृदय सी बाला, 
तितली सग खेला करती है।। 
नन्हे-नन्हे हाँथो से वो, 
चिड़ियों को दाना देती है।। 
वो नन्ही बिटिया रानी मेरी, 
सबको खूब हँसती है।।
           नन्ही बिटिया रानी- चरन सिंह
©charan