V

बकवास

बहुत कुछ बनाया है मैंने सोच से भी परे,
अब हवस सिर चढ़ चुकी है,
अब मैं विनाश कर रहा हूँ,
बहुत ढूँढा, खोज ना पाया, खुद को जहानो में,
समझ आया है कि मैं माँ बाप की रूह में निवास कर रहा हूँ,
गया है कोई इस दुनिया से खाली हाथ,
जाने फिर क्यूँ मैं खुद को इतना बदहवास कर रहा हूँ,
चढ़ चूका है शायरी का जूनून इस 'विकास' पर,
वाह वाह करती है दुनिया,
चाहे मैं बकवास कर रहा हूँ|
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©vikasgarg