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" बंधन "

प्रकृति के पास खामोश हो जाता हूं....
उसकी गहराई में मदहोश हो जाता हूं....
उसके साथ से उसी के स्वरूप में खो जाता हूं....
दृश्य में उसके विभोर हो जाता हूं.....
और मन के विचारों से परे आनंदित चकोर हो जाता हूँ...
बंधनों से बंधी उसकी डोर हो जाता हूं....
उसके सागर के किनारे का छोर हो जाता हूं.....
ना जाने ये ऐसा बंधन है कि
हर दिन थोड़ा उसकी ओर हो जाता हूं........
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