V

ब्राह्मण

चारो वर्णो में से प्रथम वर्ण है ब्राह्मण,
ब्रह्मा जी के मुख से उत्पन्न हुए थे ब्राह्मण,
धर्म के ज्ञाता थे ब्राह्मण,
धर्म के सच्चे रक्षक थे ब्राह्मण,
धर्मनिष्ठ होते थे ब्राह्मण,
कर्मनिष्ठ होते थे ब्राह्मण,
वेदों के ज्ञाता, रक्षक थे ब्राह्मण,
लोगों में जीवन संचार करते थे ब्राह्मण,
तत्वदर्शी होते थे ब्राह्मण,
वशिष्ठ, व्यास, वाल्मीकि थे धर्मनिष्ठ ब्राह्मण,
लोगों को पुण्यवान बनाते थे ब्राह्मण,
इक राजा से भी ऊंची पदवी पर थे ब्राह्मण,
ना जाने क्यों बिगड़ गया ब्राह्मण,
ब्राह्मण बिगड़ा तो समाज बिगडा़,
या फिर पहले
समाज बिगड़े तो ब्राह्मण बिगडा़,
पता नहीं कौन पहले बिगडा़,
हम क्यों करें फालतू का झगड़ा,
हमें काहे का लफड़ा,
हमें तो चादर डाल के सो जाना है,
देश का, संस्कृति का जो होना है वो होना है।
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©vikasgarg