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ब्रेनलेस खोपड़ियां नर कंकाल ही तो हैं देश सजा हुआ है आजकल ऐसे कंकालों से बिना…

ब्रेनलेस खोपड़ियां नर कंकाल ही तो हैं
देश सजा हुआ है आजकल ऐसे कंकालों से
बिना कैनुला के ही खींच लिया है सारा रक्त
बेजान और बेरंग लाशों का शहर बना है
जो सारे जहां से अच्छा था एक दिन
पूरी वसुधा पर बारूद बोया जा रहा है
नागफणी की खेती लहलहा रही है
सींचा जा रहा है नफरतों की बारिशों से
अब चिनाब, गोदावरी, नर्मदा, कृष्णा
सब में एक ही रंग का पानी बह रहा है
सहजन की फलियां विषैले नाग बनी है
किसानों के हल, फाल छीन लिए हैं जाहिलों ने
भालों से खोद डाला है, पूरे के पूरे जम्बूद्वीप को
सड़ी हुई लाशों की सड़ांध फैली है हवाओं में
नरमुंड अब तहखानों से निकल कर
सजा दिए गए हैं शीशे की अलमारियों में
पेट्रोल छिड़क कर फूंक दिया है पूरा देश
अब चारों तरफ धुआं धुआं सा हो गया
केसर की क्यारियां, सेवो के बाग सब के सब
शमशान बना दिए हैं, संविधान से खींचकर धाराओं को
नीरो को बुला लिया है, बांसुरी की धुन बजवाने
अब उनकी तूतीयां बज रही है जो खुद तूंती थे
यज्ञ की आहुति में सब आहूत कर दिया है
एक तरफ तैमूर लंग है एक तरफ चंगेज खान
जाग गए हैं मिहिरकुल के वंशज और
चल पड़े हैं हिटलर के नक्शे कदम पर
ध्वस्त करने, चंद्रगुप्त और सम्राट अशोक की विरासत
©jhshrilal