बादलों से पानी जब मोती बनकर गिरता है..
हवाओं के झोंकों से लहराकर चलता है ....
कभी बड़े कभी छोटे स्वरूप में ढलता है ....
पेड़ों के पत्तों को छूकर निकलता है....
बेरंग होकर भी उनमें रंगों को भरता है....
जमीन की गहराइयों में जाकर की मिलता है....
मिट्टी में जाकर टुकड़ों में बंटता है.....
मिट्टी के रंन्ध्रो को अपने टुकड़ों से भरता है....
मिट्टी की महक को जागृत वो करता है....
प्रकृति को रंगों से अद्भुत वो करता है ....
बादलों में रहकर वो गिरता संभलता है ....
आंखों में सुंदर स्वरूप उसका बनता है ....
सांसो की डोर से जाकर वो जुड़ता है.....
कहानी है उसकी जो धरा पर बरसता है....
लोगों के जीवन को जीवतं जो करता है.....
©myemotions
M