मैं अब नहीं रुकूंगा
निरंतर आगे बढ़ता रहूँगा
नहीं मानूंगा हार मैं
अपने रास्ते पर चलूँगा
दम है तो रूक लेना मुझे
अब तो सिर्फ मंजिल पर ही रुकूंगा
बस अब निरंतर चलूँगा
बस अब निरंतर चलूँगा
रास्ते चाहे कितने भी हो
मैं अब खुद के रास्ते पर ही चलूँगा
तुम गिरना मुझे बार बार
मैं फिर भी खड़ा हो जाऊंगा
खींचना चाहे मेरे पैर तुम
पर अब मैं अब नहीं रुकूंगा
बस अब निरंतर चलूँगा
बस अब निरंतर चलूँगा
क्या कहते लोग
अब फ़र्क नहीं पड़ेगा
खुश रहूँगा हर पल
किसी की परवाह नहीं करूँगा
मन लगा कर मेहनत करूँगा
और लक्ष्य को प्राप्त कर के रहूँगा
बस अब निरंतर चलूँगा
बस अब निरंतर चलूँगा
रास्ते चाहे कितने भी हो कठिन
मैं उन्हें आसानी से पार करूँगा
नहीं डरूंगा इन रास्तो से
बस आगे बढूंगा
सोचूंगा बस सपनो के बारे मैं
और उन्हें पूरा करूँगा
बस अब निरंतर चलूँगा
बस अब निरंतर चलूँगा
तुम चाहे काट देना मेरे पैर
फिर भी मैं एवेरेस्ट चढूँगा
जब लक्ष्य मेरे है
तो मेहनत भी मैं ही करूँगा
अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बना कर
मैंने इतिहास बदल कर रहूँगा
बस अब निरंतर चलूँगा
बस अब निरंतर चलूँगा
अपने लक्ष्यों को भी प्राप्त कर रहूँगा
अब मैं भी इतिहास रच कर रहूँगा
अब मैं भी इतिहास रच कर रहूँगा
अब मैं निरंतर चलूँगा
अब मैं निरंतर चलूँगा
द्वारा :- शुभ शर्मा
प्रेरक वक्ता
©shubh
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