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बस एक कोशिश ✍

जो रुठे है, उन्हें कहाँ मना
सकते है, बस एक कोशिश
कर सकते हैं,
जो भटके है, उन्हें मंजिल
कहाँ दे सकते हैं, बस रास्ता
दिखा सकते हैं,
जो टुट गये हैं जिंदगी से उन्हें
कहाँ समेट सकते हैं, बस
हौसला दे सकते हैं,
किसी की जगह नहीं ले
सकते, पर हां उससे बेहतर
बनने की कोशिश कर सकते
है,
इंसान ही है हम सब भगवान
नहीं बन सकते..
जो रुठे है, उन्हें कहाँ मना
सकते हैं॥
©banirai