झील जैसी आँखे हो उसकी
लगाए जिसमे हम प्रेम के गोते
सुनाये अपने दिल का हाल
बाँहों में हमारी सोते सोते
होठ हो जैसे पंखुड़ी गुलाब
भरा हो जिनमें प्रेम का आब
खोल के यौवन की किताब
करे पूरे हमारे दिल के ख्वाब
चेहरा हो मानो मधुशाला
जिसमे हो मदहोश मन मेरा
देखते देखते उसको शाम ढले
पता ना चले कब हुआ सवेरा
अंग अंग हो फूलों से कोमल
छुअन करे मन को शीतल
और तन में भरे प्रेम अंगार
तन मन में फिर प्यार ही प्यार
बस इतनी सी अर्ज हमारी
गर्लफ्रेंड हो ऐसी प्यारी
छुए हमें भी इश्क़ की बीमारी
कहे हर मजे में यह है भारी
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©vikasgarg
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