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बस का न था ....

कुछ खामियाँ तेरी भी थी...
सारा कसूर वक्त का न था
अब तो यु लगता है............
वो शख्स मेरे हक का न था
सारी चीज़े जला दी
जिससे याद तेरी आए
पर चांद को न मिटा सका
वो मेरे बस का न था
©akkshat28