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बस तेरा बसेरमाँगता हूँ....!

उजालो में रह कर अंधेरा माँगता हूँ, रात की चाँदनी से सवेरा माँगता हूँ, दौलत शोहरत की नही ज़रूरत, मैं तो हर सांस मे तेरा बसेरा माँगता हूँ..
©rohit123