💝💞अब्र बन जाऊं मैं,
तू चलना चाहे तो चल सके..
बाद बन जाऊं मैं,
जो साँसों में तेरी घुल सके...
बारां बन जाऊं मैं,
छूकर तुझे माटी में मिल सके..
कौस-ओ-क़ुज़ह बन जाऊं मैं,
जिसे देख तेरी सूरत खिल सके..
ऐसी नूरी बन जाऊं मैं,
जो कैफ तेरी बन सके...
जो कैफ तेरी बन सके...🌹🌹
©deeprichu
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