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बस यही सोच कर हर तपिश में जलता आया हूँ; धूप कितनी भी तेज़ हो समंदर नहीं सूखा…

बस यही सोच कर हर तपिश में जलता आया हूँ;
धूप कितनी भी तेज़ हो समंदर नहीं सूखा करते।
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©rohittiwar