बताओ कहाँ नहीं हो तुम।
मेरी सुबह मे तुम।
मेरी शाम मे तुम।
मेरे दिन मे तुम।
मेरी रात मे तुम।
मेरे बात मे तुम।
मेरे साथ मे तुम।
मेरी तन्हाई मे तुम।
मेरी ख़ामोशी मे तुम।
मेरे सवाल मे तुम।
मेरे जवाब मे तुम।
मेरी सर्द रातों मे तुम।
मेरी गर्म धूप मे तुम।
मेरी छाँव मे तुम।
मेरी बांहों मे तुम।
मेरी आहों मे तुम।
मेरे आंसुओ मे तुम।
मेरी मुस्कुराहट मे तुम।
मेरे बरसात मे तुम।
मेरे बसंत मे तुम।
मेरे जज़्बात मे तुम।
मेरे हालात मे तुम।
मेरे दिल मे तुम।
मेरी धड़कन मे तुम।
मेरी सांस मे तुम।
मेरी आस मे तुम।
मेरे विश्वास मे तुम।
मेरी रूह मे तुम।
मेरे सुकून मे तुम।
मेरी परेशानी मे तुम।
मेरे व्यवहार मे तुम।
मेरे त्यौहार मे तुम।
मेरे संस्कार मे तुम।
मेरी सादगी मे तुम।
मेरे श्रृंगार मे तुम।
मेरी चुप्पी मे तुम।
मेरी नाराजगी मे तुम।
मेरे नखरे मे तुम।
मेरी नज़ाकत मे तुम।
मेरी शरारत मे तुम।
मेरे भोलेपन मे तुम।
मेरी नींद मे तुम।
मेरे आँख मे तुम।
मेरे ख्वाब मे तुम।
मेरी सोच मे तुम।
मेरे विचार मे तुम।
मेरे सुर मे तुम।
मेरी तान मे तुम।
बोलो कहाँ नहीं हो तुम।
जहाँ सोचु वहां हो तुम।
जहाँ देखु वहां हो तुम।
हर जगह , हर मंजर मे तुम।
तुम ही तुम तुम ही तुम।
बस तुम तुम तुम।
✍️शिवन्या
I